07
May
10

वाह रे वाह नारी !

वह प्यारी सी सूरत,

जैसे हो प्रेम की मूरत.

उसका सर झुकाकर शर्माना,

जैसे गुलाब के फूल बरसाना.

उसका मस्त अंदाज़ मे हँसना,

जैसे नया सूरज निकलना.

पहली ही नज़र मे हो गया था उसका दीवाना,

बहुत मुश्किल था उसको अपना बनाना.

हो गया था सच्चा प्यार,

जिसका पहले उसने किया इज़हार .

सबसे जुदा सबसे अलग थी वो,

भगवान की सबसे सुंदर “कृति ” थी वो.

हम अच्छे से घुल-मिलने लगे,

साथ ही साथ प्यार के झूले झूलने लगे.

हो गई थी मेरी सारी जेब खाली,

करते करते उसकी रखवाली .

रखता था उसका बहुत ध्यान,

क्योंकि मैं था उसपे पूरी तरह से क़ुर्बान.

एक दिन हुई मुझसे गलती,

वह बोली “अब तुमसे नहीं बनती “.

कहाँ गई वो सूरत, वो हँसी,

जो कल थी यहीं कहीं ?

उसने की कलाकारी,

और बना दिया मुझे ब्रहमचारी.

अब कहाँ जाए यह ब्रहमचारी,

लेकर उसकी यादें सारी ?

दे दी मुझे जिंदगी भर की सज़ा,

और खुद करने लगी दूसरों के साथ मज़ा.

वाह रे वाह नारी,

हिला दी उसने मेरी दुनिया सारी.

अब दुखता है दिल, बहुत तड़पता है दिल,

क्योंकि वही है मेरे दिल की असली कातिल.

[poll=3012030]

Advertisements

3 Responses to “वाह रे वाह नारी !”


  1. May 7, 2010 at 4:10 am

    bro rocking dese days

    ha!!!
    gud

  2. 2 RITWIK
    May 7, 2010 at 4:31 am

    sir feelings bahar aa rahi hain… good job yaar..

  3. 3 satyam
    June 7, 2010 at 2:16 pm

    gud one……
    keep it up …….


Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s


Enter your email address to subscribe to this blog and receive notifications of new posts by email.

Join 6 other followers