Archive for June, 2010

07
Jun
10

घर-एक मंदिर

आज दिल में अजीब सा दर्द हुआ,

किस बात ने दिल को इतना अंदर से छुआ ?

था यह घर से दूर जाने का डर,

जिस घर में  रहते है मेरे भगवान अंदर !

अब उनके क्या चर्चे सुनाए,

आप सबको क्यूँ जलाए ?

वो है मेरे माता पिता,

जिन्हें मानता  हूँ  मैं अपना खुदा !

उनके संघर्ष के महल के सामने,

मेरा संघर्ष तो महज़ एक पान की दुकान तक ना था !

उनकी कुर्बानियों के सामने,

मेरी कुर्बानी, कुर्बानी ना रही !

उनके प्यार और संस्कार ने बना दिया मुझे काबिल,

समंदर से भी बड़ा है उनका दिल !

मुझे सफल इंसान बनाना था उनका सपना,

जो अब है लगता मुझे अपना अपना !

उनके दो बूँद आसूँ भी चुभते है दिल को,

इसलिए डरता है दिल घर छोड़कर जाने को !

मेरा वो हर दिन सफल है ऐ मौला,

जिस जिस दिन मैंने उनकी ख़ुशी को है तोला !




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