13
Aug
10

अनकही भावनाए

जब देखा मैंने उसे पहली बार,
हो गया था मुझे उससे प्यार !

करती थी वो आँखों से बार-बार प्रहार,
नज़र मिलते ही हो जाती थी मेरी हालत ख़राब !

उससे बात करने को तरसता था दिल,
कहीं खो न दू डरता था दिल !

वो जब-जब दिख जाती,
ज़िन्दगी रौशनी से भर जाती !

वह प्यारी सी सूरत, वह लाजवाब चेहरा,
छुप छुप देखता था मैं उसे ठहरा-ठहरा !

कई बार हुई उससे अकेले मुलाकात,
पर कह नहीं पाया दिल की बात !

शायद कुछ था उसके भी मन में,
जो नहीं कह पाती थी वो शब्दों में !

जिस दिन ना होती उससे मुलाकात,
लगता था कैसे गुजरेगा यह दिन और रात !

पता थी उसे भी मेरे दिल की बात,
शायद इसीलिए खाती थी इतने भाव !

अभी भी बाकी है तीन और साल(कॉलेज में),
पर ना जाने कब खत्म होगा यह इंतज़ार !

जब होगा यह इंतज़ार खत्म,
तब रहेगी ज़िन्दगी में रोशनी हरदम !

अनमोल राजपुरोहित

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3 Responses to “अनकही भावनाए”


  1. 1 TEJA DVM
    August 13, 2010 at 12:22 pm

    Anmol , you are really good at writing poems . You have that creativity in you . ” Jatin Sharma ” from 4th year also wrote lot of poems . Just meet him and look into what he wrote 🙂


    Teja DVM,
    Literary Committee ( 2009-2010 ),
    LNMIIT.

  2. 2 Deepak Khanduja
    August 17, 2010 at 3:11 am

    Good one Anmol, keep it up ….

  3. 3 ibn babuta
    September 17, 2010 at 12:42 pm

    anmol bhai,

    naya maal kab launch kar rahe ho market mein ??

    kafi dino se kuch fresh maal nahi aaya !

    jai hind.


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